भारत में ज़्यादातर MSMEs और सप्लायर्स के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह आती है कि बड़े कॉरपोरेट्स या सरकारी कं पनियों को माल डिलीवर करने के बाद भी उनके payments 30, 60 या 90 दिनों तक अटक जाते हैं।
इस लंबे क्रेडिट पीरियड के दौरान बिज़नेस का काम न रुके, इसके लिए कारोबारियों के पास आम तौर पर दो रास्ते होते हैं: बैंक से नया business loan लेना या फिर अपने मंजूर बिलों के बदले invoice discounting चुनना।
अगर आप भी इस बात को लेकर उलझन में हैं कि invoice discounting vs loan में से क्या सही रहेगा, तो आइए बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि दोनों में क्या अंतर है और आपके बिज़नेस के लिए कौन सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद है।
Business Loan क्या होता है?
पारंपरिक business loan एक ऐसा तरीका है जिसमें बैंक या वित्तीय संस्थान आपके पुराने वित्तीय रिकॉर्ड देखकर एक तय समय के लिए एक मुश्त रकम उधार देतेहैं।
- कर्ज़ और ई एम आई: यह एक शुद्ध कर्ज़ (debt) होता है, जिसे आपको हर महीनेब् याज के साथ नियमित EMI के रूप में चुकाना पड़ता है।
- Collateral की ज़रूरत: ज़्यादातर मामलों में बैंक लोन देने के लिए प्रॉपर्टी, फैक्ट्री की ज़मीन, मकान, फिक्स्ड डिपॉजिट या पर्सनल गारं टी की मांग करते हैं।
- लंबी प्रक्रिया: लोन पास कराने के लिए पिछले 2 से 3 साल के ऑडिटेड वित्तीय स्टेटमेंट, आई टी आर और सिबिल स्कोर की जांच होती है। बैंक सेपैसा खातेमें आने में अक्सर 2 से 4 हफ्ते का समय लग जाता है।
- उपयोग: इसका इस्तेमाल आमतौर पर लंबी अवधि के बड़े कामों के लिए किया जाता है, जैसे नई मशीन लगाना, नया प्लांट खोलना या बिज़नेस का विस्तार करना।
Invoice Discounting क्या होता है?
Invoice discounting कोई कर्ज़या लोन नहीं है। यह आपकी अपनी ही बेची गई सामग्री का अटका हुआ पैसा समय से पहले पाने का एक आधुनिक वित्तीय तरीका है।
जब आप किसी खरीदार को सामान सप्लाई करतेहैं और खरीदार आपके इनवॉइस को अप्रूव कर देता है, तो आप उस मं जूर इनवॉइस को बैंक या वित्तीय सं स्थान को सौंपकर तुरंत कैश ले सकते हैं।
- तुरंत लिक्विडिटी: आपको खरीदार के 60 या 90 दिन केलं बेक्रेडिट पीरियड का इं तज़ार नहीं करना पड़ता।
- बिना किसी Collateral के: इसके लिए आपको कोई ज़मीन, मकान या एफडी गिरवी रखनेकी ज़रूरत नहीं होती। फंडिंग इनवॉइस की सत्यता और खरीदार की वित्तीय साख पर आधारित होती है।
- सीधा सेटलमेंट: जब इनवॉइस का समय (due date) पूरा होता है, तब खरीदार सीधे उस वित्तीय संस्थान को पूरे पैसे का भुगतान कर देता है।
- उपयोग: इसका मुख्य इस्तेमाल रोज़मर्रा के working capital की कमी को दूर करने और अटके हुए payments से कैश निकालने के लिए किया जाता है।
Invoice Discounting और Business Loan में मुख्य अंतर
दोनों विकल्पों की तुलना नीचे दी गई टेबल से आसानी से समझी जा सकती है:
| विशेषता (Feature) |
Invoice Discounting | Business Loan |
|---|---|---|
| गिरवी (Collateral) |
किसी प्रॉपर्टी या सिक्योरिटी की ज़रूरत नहीं होती। | प्रॉपर्टी, स्टॉक या पर्सनल गारंटी ज़्यादातर अनिवार्य होती है। |
| Balance Sheet पर असर | कोई नया कर्ज़ नहीं जुड़ता (Off-balance sheet)। | कंपनी की balance sheet पर लोन और देनदारी बढ़ जाती है। |
| फंड मिलनेका समय | बिड चुनने के बाद 24 घं टेके भीतर। | डॉक्यूमेंटेशन और वेरिफिकेशन के कारण कुछ हफ्ते लग सकते हैं । |
| फंडिंग का आधार | बड़े खरीदार की वित्तीय साख और अप्रूव्ड इनवॉइस। | सप्लायर की अपनी बैलेंस शीट, पुराना मुनाफा और सिबिल। |
| चुकाने की जिम्मेदारी | खरीदार ड्यूडेट पर सीधे बैंक को पैसा चुकाता है। | सप्लायर को नियमित EMI भरनी पड़ती है। |
| मौजूदा क्रेडिट लिमिट | आपकी बैंक ओवरड्राफ्ट (OD) या CC लिमिट सुरक्षित रहती है। | बैंक से आपकी कुल उधारी क्षमता (borrowing limit) घट जाती है। |
आपके बिज़नेस के लिए कब क्या सही है?
दोनों ही विकल्पों का अपना महत्व है। आपको अपनी ज़रूरत के हिसाब से सही फैसला लेना चाहिए।
पारंपरिक Business Loan कब चुनें?
- 1. लंबी अवधि का निवेश (Capex): जब आपको नई और महंगी मशीनरी खरीदनी हो या नई फैक्ट्री बनानी हो, जिसका फायदा कई सालों में मिलेगा।
- 2. बिल्कुल नया बिज़नेस: अगर आपका बिज़नेस अभी नया है और आपके पास दिखाने के लिए बड़े कॉरपोरेट क्लाइंट्स के अप्रूव्ड इनवॉइस नहीं हैं।
- 3. सरकारी सब्सिडी वाली योजनाएं: जब सरकार की किसी विशेष स्कीम केतहत कम ब्याज दर पर लंबी अवधि का लोन मिल रहा हो।
Invoice Discounting कब चुनें?
- 1. Payments अटके होना: जब आपका माल बिक चुका है, इनवॉइस अप्रूव हो चुका है, लेकिन पेमेंट आने में 30 से 90 दिन का समय बाकी है।
- 2. दैनिक Working Capital की ज़रूरत: जब कच्चा माल खरीदने, कर्मचारियों को वेतन देनेया टैक्स भरने के लिए तुरंत कैश की ज़रूरत हो।
- 3. कर्ज़ के बोझ से बचना: जब आप अपनी कं पनी पर लोन और EMI का तनाव नहीं बढ़ाना चाहते और न ही अपनी प्रॉपर्टी दांव पर लगाना चाहते हैं।
- 4. नए ऑर्डर्स पूरे करना: जब आपके पास काम के बड़े ऑर्डर्स आ रहे हों, लेकिन पुराने बिलों का पैसा न मिलने की वजह से आप नए ऑर्डर्स लेने से डर रहे हों।
Invoicemart: TReDS के साथ आसान Working Capital
अगर आपके payments कॉरपोरेट खरीदारों के लंबे क्रेडिट पीरियड की वजह सेफं से रहते हैं, तो बार-बार नया लोन लेना समझदारी नहीं है। लोन पर लगने वाला भारी ब्याज आपके बिज़नेस का मुनाफ़ा घटा देता है।
इस समस्या को हल करने के लिए रिज़र्वबैंक ऑफ इं डिया (RBI) के नियमों के तहत Invoicemart (TReDS प्लेटफॉर्म) बनाया गया है:
- मल्टीपल Financiers की उपलब्धता: Invoicemart प्लेटफॉर्म पर देश के कई प्रमुख banks और NBFCs रजिस्टर्ड हैं, जो सप्लायर्स के अप्रूव्ड इनवॉइस को देखकर उस पर अपनी प्रतिस्पर्धी बिड्स लगाने के लिए उपलब्ध रहते हैं।
- पारदर्शी व्यवस्था: उपलब्ध वित्तीय सं स्थानों द्वारा दिए गए डिस्काउं ट रेट्स आप अपने डैश बोर्ड पर देख सकते हैं और अपनी पसं द के अनुसार सबसे कम रेट वाला ऑफर चुन सकते हैं।
- 100% डिजिटल प्रोसेस: किसी भी बैंक शाखा के चक्कर लगाए बिना ऑनबोर्डिंग से लेकर इनवॉइस डिस्काउंटिंग तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी होती है।
- 24 घंटे में फंड: बिड स्वीकार करने के बाद बहुत कम समय में पैसा सीधे आपके बैंक खाते में क्रेडिट हो जाता है।
अपने व्यापार को महं गेकर्ज़ के नीचे दबाने के बजाय अपने ही बकाए इनवॉइस की ताकत का इस्तेमाल करें। Invoicemart पर डिजिटल ऑनबोर्डिंग पूरी करें और बिना किसी कोलेटरल के अपने बिज़नेस के cash flow को तेज़ बनाएं ।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या TReDS Invoice Discounting से कंपनी पर कोई कर्ज़ चढ़ता है?
नहीं। TReDS इनवॉइस डिस्काउं टिंग को कर्ज़या लोन नहीं माना जाता है। यह आपके अपने बेचे गए माल के बिल का समय से पहले भुगतान है। इसलिए यह आपकी balance sheet पर किसी नई देनदारी के रूप में नहीं दिखता।
2. क्या इनवॉइस डिस्काउंट कराने के लिए कोई संपत्ति गिरवी रखनी पड़ती है?
नहीं। इसके लिए किसी भी तरह की ज़मीन, मकान, फैक्ट्री या बैंक एफडी गिरवी रखनेकी आवश्यकता नहीं होती। यह पूरी तरह बिना किसी collateral के काम करता है।
3. इनवॉइस का भुगतान अंत मेंकौन करता है?
जब इनवॉइस का क्रेडिट पीरियड (30, 60 या 90 दिन) पूरा होता है, तब आपका खरीदार सीधे उस बैंक या एनबीएफसी को पूरे बिल का भुगतान कर देता है जिसने इनवॉइस को डिस्काउंट किया था।
4. क्या Invoice Discounting से सप्लायर की मौजूदा बैंक क्रेडिट लिमिट पर कोई असर पड़ता है?
नहीं। यह आपके मौजूदा बैंक ओवरड्राफ्ट (OD) या कैश क्रेडिट (CC) लिमिट सेपूरी तरह अलग होता है। इस से सप्लायर की मौजूदा क्रेडिट लिमिट पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
5. Invoicemart पर रजिस्ट्रेशन के लिए किन मुख्य दस्तावेज़ों और विवरणों की ज़रूरत होती है?
Invoicemart पर रजिस्ट्रेशन के लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित दस्तावेज़ और विवरण आवश्यक होते हैं:
- MSME रजिस्ट्रेशन या Udyam Certificate (MSME registration or Udyam Certificate )
- PAN और GST विवरण (PAN and GST details)
- सेटलमेंट के लिए बैंक अकाउंट विवरण (Bank account details for settlement )
- बिज़नेस एंटिटी के incorporation या registration documents (Business entity incorporation or registration documents )
- Authorised signatory verification (Authorised signatory verification )
रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी है।



