क्रेडिट साइकिल अक्सर 60 से 90 दिनों तक खिंच जाती है। बार-बार होने वाला msme payment delay किसी भी छोटे व्यवसाय के पूरे वित्तीय चक्र को अस्त-व्यस्त कर देता है। नया कच्चा माल मंगाना हो, जीएसटी का समय पर चालान भरना हो या महीने की पहली तारीख को कर्मचारियों की सैलरी देनी हो, बैंक खाते में कैश न होने पर हर योजना अटक जाती है।
अगर आपकी कंपनी भी msme payment pending की चुनौती का सामना कर रही है, तो अपने खरीदार से संबंध बिगाड़े बिना और कानूनी विवादों में फंसे बिना अपना पैसा सुरक्षित तरीके से समय से पहले पाने का व्यावहारिक तरीका यहां समझें।
MSME Payment Delay का बिज़नेस पर असली असर
जब खरीदार के पास आपकी पूंजी अटकती है, तो इसका असर केवल एक इनवॉइस तक सीमित नहीं रहता:
- Working Capital की कमी: पूंजी ब्लॉक रहने के कारण फैक्ट्री में रोज़मर्रा का उत्पादन प्रभावित होता है।
- सप्लायर्स का टूटता भरोसा: जब बड़े खरीदार से पैसा नहीं मिलता, तो आप अपने वेंडर्स को समय पर भुगतान नहीं कर पाते। इससे बाज़ार में आपकी क्रेडिट साख कमजोर होती है।
- नए ऑर्डर्स लेने से हिचकिचाहट: हाथ में लिक्विड कैश न होने पर आप नए और बड़े क्लाइंट्स के लाभदायक ऑर्डर्स ठुकराने के लिए मजबूर हो सकते हैं।
- कलेक्शन का मानसिक तनाव: बिज़नेस की ग्रोथ, सेल्स और नई तकनीक पर ध्यान देने के बजाय मैनेजमेंट का ज़्यादातर समय खरीदार के अकाउंट्स डिपार्टमेंट में फोन और ईमेल करने में निकल जाता है।
Approved Invoice से 24 घंटे में Working Capital कैसे निकालें?
यदि खरीदार ने इनवॉइस मंजूर कर ली है और समस्या केवल 60 या 90 दिन के लंबे क्रेडिट पीरियड की है, तो रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा शुरू किया गया TReDS (Trade Receivables Discounting System) आपके लिए सबसे कारगर जरिया है।
TReDS एक ऐसा डिजिटल सिस्टम है जहां सप्लायर अपने मंजूर बिलों को बैंकों से समय से पहले डिस्काउंट कराकर तुरंत कैश हासिल कर सकता है। Invoicemart इस क्षेत्र का एक प्रमुख प्लेटफॉर्म है, जहां यह पूरी प्रक्रिया बहुत ही आसान तरीके से पूरी होती है:
- इनवॉइस अपलोड: माल डिलीवर होने के बाद मंजूर डिजिटल इनवॉइस को Invoicemart पोर्टल पर अपलोड करें।
- खरीदार की डिजिटल स्वीकृति: आपका खरीदार पोर्टल पर लॉगिन करके उस इनवॉइस की पुष्टि करता है।
- बैंकों और NBFCs की उपलब्धता: इनवॉइस स्वीकृत होते ही प्लेटफॉर्म पर मौजूद कई बड़े कमर्शियल banks और NBFCs के पास वह इनवॉइस बिडिंग के लिए उपलब्ध हो जाता है।
- बिड का चयन: उपलब्ध वित्तीय संस्थानों द्वारा दिए गए डिस्काउंट ऑफर्स में से सप्लायर अपनी पसंद की सबसे किफायती बिड चुन सकता है।
- 24 घंटे में पैसा खाते में: बिड स्वीकार होते ही 24 घंटे के भीतर फंड सीधे आपके बैंक खाते में क्रेडिट हो जाता है।
- ड्यू डेट पर ऑटो सेटलमेंट: इनवॉइस का 60 या 90 दिन का समय पूरा होने पर कॉर्पोरेट खरीदार सीधे उस फाइनेंसर को पूरे पैसे का भुगतान कर देता है।
Invoicemart के ज़रिए Payment पाने के बड़े फायदे
- नॉन-रिकोर्स (Non-Recourse) फंडिंग: इनवॉइस डिस्काउंट होने के बाद अगर खरीदार तय तारीख पर बैंक को भुगतान करने में देरी करता है, तो बैंक आपसे वह पैसा वापस नहीं मांग सकता। वसूली का पूरा जोखिम फाइनेंसर का होता है।
- बिना किसी Collateral के: इसके लिए आपको कोई ज़मीन, मकान, फैक्ट्री या एफडी गिरवी नहीं रखनी होती। यह पूरी तरह बिना सिक्योरिटी के काम करता है।
- खरीदार से रिश्ते हमेशा सुरक्षित: खरीदार को भुगतान के लिए अपना पूरा 60 या 90 दिन का समय मिल जाता है और आपको पहले दिन ही कैश मिल जाता है। दोनों पक्षों का काम बिना तनाव के चलता रहता है।
- Balance Sheet पर नया लोन नहीं: यह कोई बैंक कर्ज़ नहीं है, बल्कि आपके अपने ही बेचे गए माल का पेमेंट है। इसलिए यह आपकी क्रेडिट रेटिंग और मौजूदा बैंक लिमिट को नुकसान नहीं पहुंचाता।
निष्कर्ष
लंबे क्रेडिट पीरियड और msme payment pending के कारण अपने बिज़नेस की तरक्की को रुकने न दें। बार-बार फॉलो-अप करने और महंगे अनसिक्योर्ड लोन लेने के बजाय अपने अप्रूव्ड बिलों की ताकत पहचानें।
आज ही Invoicemart पर डिजिटल ऑनबोर्डिंग पूरी करें और अपने इनवॉइस को तुरंत लिक्विड working capital में बदलकर अपने व्यापार को निर्बाध गति दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या खरीदार के 90 दिन की क्रेडिट शर्त पर अड़े रहने के बाद भी मुझे पहले पैसा मिल सकता है?
हाँ। TReDS का मकसद ही यही है। अगर खरीदार 90 दिन बाद ही पैसे देने का नियम रखता है, तो भी आप उस मंजूर बिल को इनवॉइस डिस्काउंटिंग के ज़रिए 24 घंटे में अपने खाते में ले सकते हैं। खरीदार अपने 90 दिन पूरे होने पर ही बैंक को सीधा भुगतान करेगा।
2. Invoicemart पर अप्रूव्ड इनवॉइस के लिए फाइनेंसिंग ऑफर कैसे मिलते हैं?
अप्रूव्ड इनवॉइस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध बैंकों और NBFCs के सामने फाइनेंसिंग के लिए प्रस्तुत किया जाता है। वित्तीय संस्थान अपनी क्रेडिट पॉलिसी, खरीदार की क्रेडिट प्रोफाइल और अन्य जोखिम मानकों के आधार पर उपलब्ध फाइनेंसिंग ऑफर और डिस्काउंट रेट तय करते हैं। सप्लायर अपने डैशबोर्ड पर उपलब्ध ऑफर्स देख सकता है और अपनी आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त विकल्प चुन सकता है।
3. अगर खरीदार अंतिम तारीख पर बैंक को भुगतान न करे, तो क्या सप्लायर को परेशानी होगी?
नहीं। TReDS के तहत होने वाली इनवॉइस डिस्काउंटिंग सप्लायर के लिए नॉन-रिकोर्स (Non-recourse) आधार पर होती है। इसका मतलब है कि फंड मिलने के बाद खरीदार से भुगतान वसूलने का पूरा दायित्व संबंधित बैंक का होता है, सप्लायर का नहीं।
4. क्या Invoicemart का इस्तेमाल करने के लिए खरीदार का भी प्लेटफॉर्म पर होना ज़रूरी है?
हाँ। चूंकि इस पूरी प्रक्रिया में खरीदार द्वारा इनवॉइस को डिजिटल रूप से अप्रूव करना आवश्यक होता है, इसलिए सप्लायर और कॉर्पोरेट खरीदार दोनों का TReDS प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड होना अनिवार्य है। आज देश के हजारों बड़े कॉरपोरेट्स और पीएसयू पहले से ही प्लेटफ़ॉर्म पर रजिस्टर्ड हैं।



